यादों ने देखो फिर कितना शोर मचाया है
कुछ बीती बातों से आज फिर मिलवाया है।
ख़ालीपन ने ही तो दस्तक
दी इस दिल पे
फिर क्यूँ ये अपने साथ
इतना बोझ लाया है।
जो लफ़्ज़ों में कहना
था नामुनासिब
सन्नाटा वो सारी बातें
बोल आया है।
न ख़ुशी, न ग़म, न
हँसी, न उदासी
ज़िंदगी में ये भी अजीब
मोड़ आया है।
खोखले शब्दों और वादों
पर चल रहा है ये जहाँ
खुदक़िस्मत है वो जो सारे वादे तोड़ आया है।
खुदक़िस्मत है वो जो सारे वादे तोड़ आया है।
Wonderful Mausi!
ReplyDeleteThank you Abhishek
Deleteयादों के बीच खालीपन, सन्नाटा और बोझ का होना लाज़िमी है।
ReplyDeleteअब कहना क्या, जब वादे तोड़ दिए। तन्हाई और ..... में ऐसा ही कर लेते हैं लोग।
हा हा....अब कविता में बेवफ़ाई भी नज़र आएगी अशोक जी ... अभी तो बस शुरुआत है ... फ़ंडे देने है सो दे रहे हैं ..
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