Wednesday, 16 January 2019

सबके जैसा खुद को क्यूँ बनाते हो

सबके जैसा खुद को क्यूँ  बनाते हो
धरती पे आसमान क्यूँ चाहते हो

बेबसी को ज़िन्दगी की ज़रूरत बता रहे
हौसलों को क्यूँ इतना सताते हो

इश्क़ कहीं पाने कहीं खोने का नाम है
ऐसी बातों से किस को बहलाते हो

न खेलिए किसी के ज़ज़्बातों से
जिस्म को नहीं रूह को चोट पहुंचाते हो

मुस्कराहट ज़िन्दगी की जागीर है
क्यूँ ज़िन्दगी से मुफ़लिसी चाहते हो

सवालों को कैद करने की चाहत है 
क्यूँ वक्त से बिन बात टकराते हो

Thursday, 10 January 2019

दिल से जो आवाज है आती वो हिंदी है

दिल से जो आवाज है आती वो हिंदी है
हम सब की पहचान बनाती वो हिंदी है 

तुतली-तुतली बोली में इसको हमने पाया है
माँ की ममता साथ जो लाती वो हिंदी है

संस्कृति, सभ्यता, संस्कार खुद में संजोयें हुए
खुद से खुद को ही है जो सजाती वो हिंदी है

अभिव्यक्ति को जान दिया मातृभाषा का सम्मान लिया 
सोच की दुनिया को दिनरात बहलाती वो हिंदी है

संस्कृत, उर्दू, कुछ अंग्रेजी भी है साथ लिए
हिंदुस्तान के हर रूप को अपनाती वो हिंदी है

रूप सुनहरा हर भाषा का सुन्दर सबकी बोली है
इश्क़ बन रूह तक पर जो है जाती वो हिंदी है  




  

Wednesday, 9 January 2019

धोखे में जीते रहने का और कितना प्रयास करूँ

धोखे में जीते रहने का और कितना प्रयास करूँ
टूटे को तोड़ने का बोलो कितना मैं अभ्यास करूँ

मन है मेरा शीशे का पत्थर हैं सबके हाथों में
किसको अपनी बात बताऊँ किसपर मैं विश्वास करूँ

वादों की ही लाश उठाये सब आये हैं आंगन में
उम्मीदों का तुम ही बोलो कैसे शिलान्यास करूँ

सपनों के धरौंदों को हर रोज तो रौंदा जाता है
खुशियों की चौखट पर फिर कैसे आवास करूँ

संसार को समझने के लिए संसार का त्याग ज़रूरी है
कैसे ऐसी बातों को अपनाऊं कैसे मैं सन्यास धरूँ





Saturday, 5 January 2019

किसी की बात कहाँ खुद से धोखा खाया है

किसी की बात कहाँ खुद से धोखा खाया है 
ये सच है हमने खुद से खुद को जलाया है

हवाओं की शाज़िशों में हर कोई गिरफ्तार 
पर इन शाखों ने पत्तों को खुद भी गिराया है

ताजमहल में भी हमें मकबरा ही दिखा
कुछ सोच हमने अपने लिए तो सजाया है

खुदा मान जिसके सामने हम आज हैं खड़े
कभी इन पत्थरों को हमने पैरों से हटाया है

क्या हासिल हुआ हमे चाँद पे पहुंच के
जब बचपन को हमने भूखे सुलाया है