परिवर्तन सृष्टि का नियम है
सृष्टि में हर चीज बदलती है
कुछ तेजी से इस बदलाव को पकड़ती हैं
कुछ धीरे धीरे नए रूप में ढलती है
पतझड़ में पेडो पर उदासी छा जाती है
पर वसंत इसमें खूब हरियाली लाएगी
इस बदलाव के नए पत्तों से
पेड़ों पर हरियाली लहलहाएगी
पेड़ों पर हरियाली लहलहाएगी
अगर सुबह है तो शाम भी होगा
और शाम के बाद अंधेरा भी छाएगा
पर अंधेरा जाते हुए
सुबह की लालिमा दे कर जाएगा
सुबह की लालिमा दे कर जाएगा
कितनी भी तपती गर्मी हो
वो शाम को देकर ही जाएगी
साथ अपने वो कुछ गरम किरणें भी
साथ अपने वो कुछ गरम किरणें भी
समेट के लेकर ही जाएगी
सृष्टि के हिसाब से हमें भी चलना है
हमें भी माहौल के अनिरूप बदलना है
हाँ हमें भी अपने आराम के घर से
बदलाव के लिए बाहर निकलना है
बदलाव के लिए बाहर निकलना है
अगर दिल में अंधेरा है तो ये परिवर्तन उजाला दे जाएगा
और अगर उजाले से आंखें चौन्धिया गई है
तो अंधेरा आंखों को थोड़ा आराम पहुचाएगा
ये परिवर्तन ही हमें नई राह दिखलाएगा
हम फिर क्यों परिवर्तन से घबराते हैं
हम क्यों दूसरों में ही बदलाव चाहते हैं
बदलाव तो हमें अपने में ही लाना है
अगर हमें अपने आस पास को जगमगाना है

