हर रिश्ते में अपनी परेशानी है
हर रिश्ते की अपनी रवानी है
कुछ रिश्तों में ही अटक गए
कुछ रिश्तों में ही लटक गए
कई रिश्तों से बर्बाद हुए
कई रिश्तों से आबाद हुए
कुछ रिश्तों से ही संभल गए
कुछ रिश्तों से ही बिखर गए
कभी रिश्तों ने हमे मनाया है
कभी रिश्तों ने हमे रुलाया है
कुछ रिश्तों में झीना-झपटी भी
कुछ रिश्तों में मरहम पट्टी भी
कुछ रिश्तों ने बंधन भी खोले हैं
कुछ रिश्ते कई बार हमें तोड़े हैं
कुछ रिश्ते यूँ ही पीछे छूट गए
कुछ रिश्ते बेमतलब रूठ गए
कई रिश्तों में हम आज भी उलझे हैं
कई रिश्ते आज भी तो अनसुलझे हैं
रिश्तों की रोज इक नई कहानी है
रिश्तों की बात पर वो ही पुरानी है
जो आबाद हुआ वो ही तो रिश्ता था
जो बर्बाद हुआ बस इक किस्सा था
हर रिश्ते की अपनी रवानी है
कुछ रिश्तों में ही अटक गए
कुछ रिश्तों में ही लटक गए
कई रिश्तों से बर्बाद हुए
कई रिश्तों से आबाद हुए
कुछ रिश्तों से ही संभल गए
कुछ रिश्तों से ही बिखर गए
कभी रिश्तों ने हमे मनाया है
कभी रिश्तों ने हमे रुलाया है
कुछ रिश्तों में झीना-झपटी भी
कुछ रिश्तों में मरहम पट्टी भी
कुछ रिश्तों ने बंधन भी खोले हैं
कुछ रिश्ते कई बार हमें तोड़े हैं
कुछ रिश्ते यूँ ही पीछे छूट गए
कुछ रिश्ते बेमतलब रूठ गए
कई रिश्तों में हम आज भी उलझे हैं
कई रिश्ते आज भी तो अनसुलझे हैं
रिश्तों की रोज इक नई कहानी है
रिश्तों की बात पर वो ही पुरानी है
जो आबाद हुआ वो ही तो रिश्ता था
जो बर्बाद हुआ बस इक किस्सा था