पैरों को ज़मीं का इख़्तियार कहाँ
अपनी बातों पे हमें ऐतबार कहाँ
हर सच से दिल बख़ूबी वाक़िफ़ है
पर दिल की बातों का अख़बार कहाँ
हम ज़िंदगी में कई बार ठोकर खाएँगे
बातों में न आना आदत में शुमार कहाँ
ये बातें भी उन तक पहुँच जाएगी
बातों के लिए सरहद कोई दीवार कहाँ
इश्क़ वक़्त के साथ बदल ही जाता है
अब वो ख़लिश वो तड़प वो ख़ुमार कहाँ