धरती और आसमान ये ना कभी मिले है
और ना कभी इनका मिलना होगा
ये बस एक दूसरे को देख समय बिताते हैं
आपसी दूरी के साथ चलते जाते हैं
इनका मिलना एक मृगतृष्णा है
जो कभी हिरण की प्यास बढ़ाता है
उसे पानी के लिए तरसाता है
और कभी भ्रम में आसमान को
धरती के कितने पास दिखता है।
दो ध्रुवों का समानांतर समभाव यही तो हेता है।
ReplyDelete