Monday, 18 July 2016

धरती और आसमान

धरती और आसमान ये ना कभी मिले है
और ना कभी इनका मिलना होगा
ये बस एक दूसरे को देख समय बिताते हैं
आपसी दूरी के साथ चलते जाते हैं
इनका मिलना एक मृगतृष्णा है
जो कभी हिरण की प्यास बढ़ाता है
उसे पानी के लिए तरसाता है
और कभी भ्रम में आसमान को
धरती के कितने पास दिखता है।

1 comment:

  1. दो ध्रुवों का समानांतर समभाव यही तो हेता है।

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