Wednesday, 20 July 2016

फिर वही सब

आप फिर वही सब ग़लतियाँ दोहरा रहे हो
बिन देखे ही अपनी हर धारणा बना रहे हो।

देखना है तो अपने दिल से उसे देखो
आप फिर अक़्ल से ही काम चला रहे हो।

वो दोस्ती थी उसे दिल्लगी बता कर
आप क्यूँ मुझे ही झूठा बना रहे हो।

वो बहकी - बहकी बातें फिर से
उल्टा हमें ही नशे में बता रहे हो।

देखा है हमने भी ये दुनियादारी
आप कौन सी नई बात हमें सुन रहे हो।

नज़रों से आप हो धोखा खाए
अपने चश्मे को क्यूँ आँखो से हटा रहे हो।

जब मेरे घर का कोना-कोना जल चुका है
आप अपनी अंगुलियाँ हमें दिखा रहे हो।

मुलाक़ात किस से करे हमें कोई जंचता ही नहीं
बुत बने इंसानो से आप हमें मिलवा रहे हो।

सीधी बात करना आपके बस की बात नहीं  
किसी और पर चिल्ला कर क्यूँ अपना ग़ुस्सा जता रहे हो।

1 comment:

  1. कौन है वो, जो ज़िद किए जा रहा है ?

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