किनारे
पर सहारा मिलता नहीं है
डूबने ने पे किनारा दिखता नहीं है
डूबने ने पे किनारा दिखता नहीं है
क़ाबिलियत
की क्या बात करे हैं
ज़रूरतों
के बाज़ार में ये बिकता नहीं है
कुछ
भी अजूबा नहीं इस दुनिया में है
बस
आँखों को कई बार दिखता नहीं है
मोहब्बत
भी तो एक जानलेवा बीमारी है
बस
वक़्त और हालात पर ये टिकता नहीं है
उन्हीं
ताल्लुकात पे ये दुनिया रुकी है
मतलब
के लिए जिनमे कोई रिश्ता नहीं है