Sunday, 24 July 2016

औरत हूँ दीये से दीया जलाया है

कौन कहता है अगर दीये से दीया जलाओगे
तो बिना कुछ खोये सिर्फ़ रौशनी पाओगे
ऐसा करने से रौशनी ही जगमगाएगी
चारों तरफ़ उज़ियारी खिलखिलाएगी।

माना ज्योत से ज्योत जलाने से रौशनी आती है
ऐसा करने से कुछ अँधियारी भी छँट जाती है
पर ये ग़लत है इससे दीये का कुछ नहीं खोता है
रौशनी देने से दीये को कुछ नहीं होता है।

कर के देखो तो सही में समझ आएगा
मैं जो लिख रही हूँ वो भी दिख जाएगा
जलने के लिए किसी एक दीये को झुकना पड़ता है
देनेवाले या लेनेवाले को नीचे या ऊपर उठना पड़ता है।

खड़ी मोमबत्ती तो और भी
किसी दूसरी मोमबत्ती को लौ नहीं पहुँचा पाती है
वो तो खड़े खड़े ख़ुद जलती है
हाँ समय के साथ वो ख़ुद-ब-ख़ुद गलती है।

दूसरों को रौशनी देने के क्रम में कभी देखा है
कई बार लौ भी थोड़ी सी घटती है
कई बार दीये की भी घटा लौ देने में छँटती है।
कई बार लगता है जैसे वो कुछ तड़पती है।

हाँ कितनी ही बार लौ कंपकंपाती है।
मुझे तो कई बार लगता है वो थोड़ा तड़फड़ाती है
कई बार ऐसा करने में तेल भी लड़खड़ाता है
इस कोशिश में कई बार ख़ुद को फ़र्श पर पाता है।

कई बार रौशनी देने की कोशिश में
दीया अचानक ही बुझ जाता है
रोशनी देने की चाहत में वो ख़ुद को
पूरी तरह अंधकार में पाता है।

नहीं मै किसी को निराशावादी नहीं बना रही हूँ
बस जो देखा है उसे ही सुना रही हूँ
मै पूरी तरह मानती हूँ देने की परम्परा अच्छी है
देने से ही तो ये दुनिया बसती है।

पर ये भी तो जानिए पानेवाले को भी लड़ना पड़ता है
और देनेवाले को भी कई बार कितना कुछ सहना पड़ता है
कुछ भी कहाँ इतनी आसानी से ज़िंदगी में आता है
इस लेने देने में रौशनी का भी अंधेरे से कुछ नाता है।

दीये का ये रूप मैं इसलिए देख पाई हूँ
क्यूँकि मैंने बहुत दीया जलाया है
हर दिवाली तो दीये से दीया जलाकर ही मनाया है
साफ़ शब्दों में कहूँ तो मैंने औरत के रूप में जीवन बिताया है।  

5 comments:

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  2. लेन देन तो पुरानी बात है
    इस में कंहा कोई नइ बात है
    वही दीया जलता है हरदम
    रोशनी देता है हर वक्त
    दीये से दीया तो जलाना पडता हे
    फीर कंही दील तो नही जलता है ना?
    कोनो से कान लोग कहते है
    दील से दील भी जलाते है
    दीया आपने ब्होत जलाये हे
    अच्छा हे उजाला भी तो दीया है
    वर्ना दीया लोग मंदीरो में जलाते हे
    अंधेरा खुद अपने हदय में पाते है
    क्युं नही रोशनी झगझगाती
    सारे जग मे चीराग जलने के बाद
    नजर जो लग गई उन गीदर्दो की
    दीये से दीया कौन जलायगा अब

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    1. मैंने अपनी ग़लतियाँ कुछ कुछ सुधारी है ..कोशिश कीजिए कुछ कुछ आप भी सुधार लेंगे ...पर कॉमेंट के लिए और लिखने के लिए शुक्रिया ...

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    2. मै भी गल्ती सुधार रहा हुं......शुक्रिया जी

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    3. This comment has been removed by the author.

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