Wednesday, 30 November 2016

ख़ुद को समझाने में हमें वक़्त लगे

ख़ुद को ही समझाने में हमें वक़्त लगे
ख़ुद को सच दिखलाने में हमें वक़्त लगे।

इश्क़ की हक़ीक़त से तो हम वाक़िफ़ थे
पर दिल को हक़ीक़त बताने में हमें वक़्त लगे।

ज़िंदगी यूँ ही ख़्वाबों-ख़यालों पर चल पड़ी 
कुछ ख़्वाबों को ज़िंदगी से हटाने में हमें वक़्त लगे।

दूर तक नज़रों ने उम्मीदों से देखा था एक जहाँ
उम्मीदों को उन राहों से वापस लाने हमें वक़्त लगे।

जिन की ख़ातिर हम टूटे टूटे से रहते थे
उन्हें भी दिल से तोड़ कर हटाने में हमें वक़्त लगे।

ख़ुद से ही हर वक़्त रहा शिकवा-ए-रू-ब-रू
ख़ुद को ख़ुद से रू-ब-रू करवाने में हमें वक़्त लगे।



Tuesday, 29 November 2016

हाँथों की लकीरों को बदल पाना मुश्किल था

हाँथों की लकीरों को बदल पाना मुश्किल था
शाम थी ज़िंदगी कि सुबह बनाना मुश्किल था।

बंदगी में खुदा की खुदा से हम कितना चाहते  
पर खुदा को ख़ुद के दिल में बसाना मुश्किल था।

ख़्वाब-ख़्वाहिशों की हर हक़ीक़त से हम वाक़िफ़ हैं
पर ख़्वाहिशों की आज भी गर्दन दबाना मुश्किल था।

ये जूनून-ए-दीद उल्फ़त की मजबूरी है
पर वक़्त को इस बात पर मनाना मुश्किल था।

हम जानते हैं इश्क़-ए-बुत अब बिगड़ गई
पर दिल को ये सच समझाना मुश्किल था।

आपकी बेबाक़ सहाफ़त को तहे दिल से सलाम
पर सहाफ़त की बातों से वतन बचाना मुश्किल था।  



Monday, 28 November 2016

बारिश कुछ इस क़दर भिगो गई

बारिश कुछ इस क़दर भिगो गई
हर सामान को ख़ुद में डुबो गई।

चाँद और तारों की तमन्ना कब थी
पर ये आँधी तिनको को भी संग ले गई

खोमशी का लबों पर हर वक़्त पहर पड़ा है
पर मुस्कुराने की इसकी आदत क्यूँ खो गई

धूप इस चौखट पर आएगी कभी
सामने घरों में दीवारें जो खड़ी हो गई

हाथ अब किसी से मिलाए तो कैसे भला
आखों को सच बोलने की आदत जो हो गई।




Sunday, 27 November 2016

शहर मेरा कुछ दिवानों सा है

शहर मेरा कुछ दिवानों सा है
कुछ नादान कुछ सयानों सा है।

इसकी भीड़ में तुम खो जाओ कहीं
ख़ुद का ख़याल भी यहाँ कुछ भुलाने सा है।

इसकी ख़ामोशी में भी शोर है छिपा
हर वक़्त बोलता ये कुछ परवानों सा है।

दुश्मन भी यहाँ दोस्त बन कर ही मिला
और दोस्तों का हाल कुछ बेग़ानों सा है।

ऊँची मीनार देख कुछ धोखा खा गए
घर यहाँ पर छोटे छोटे अफ़सानों सा है।

कभी ख़ुद से रूठता कभी ख़ुद से टूटता
आदत मेरे शहर की कुछ इंसानों सा है।

किसी को सब दे दिया किसी से सब ले लिया
फ़ितरत इसका भी तो कुछ भगवानो सा है

ज़िंदगी इसकी ‘हाइ’ और ‘बाय’ में सिमट गई
हर मुलाक़ात यहाँ व्हाट्सप्प के फ़सानो सा है।