Monday, 27 January 2020

कुछ ख्वाबों का दिल तोड़ देते हैं

कुछ ख्वाबों का दिल तोड़ देते हैं 
कुछ अरमानों से मुँह मोड़ लेते हैं 
सच और झूठ से अब और कितना लड़े
कुछ वक्त की अंगड़ाइयों पे छोड़ देते हैं

कुछ ख्वाहिशों के बोझ ने कितना सताया
कुछ सपनों ने भी कितनी रात जगाया 
वक्त से ही क्यूँ करे सब शिकवे-गीले 
इन भारी-भरकम बेड़ियों को तोड़ देते हैं

इस दुनिया को हम छोड़ सकते नहीं 
आसमान पे इक दुनिया जोड़ सकते हैं
तो क्यूँ उल्झे जहन में उपजे सवालों से 
अपनी इन नादानियों को झकझोर देते है

ये भरम है की ये हो सकता था
ये भी नहीं की कोई साथ रो सकता था
जो न हुआ वो कभी होगा भी नहीं 
इस इक बात को जीवन में ओढ़ लेते हैं

हम जानते हैं बहुत मुश्किल है कुछ छोड़ देना
हम मानते हैं बहुत मुश्किल है कुछ तोड़ देना
पर किसी पे नहीं हमारा खुद पे ही इख़्तियार है
इसी सच को दिल से मज़बूती से जोड़ लेते हैं 

Saturday, 25 January 2020

सच की उम्मीदों के साये में हम चल रहे हैं

सच की उम्मीदों के साये  में हम चल रहे हैं
पर अजीब है न हम झूठ को देख मचल रहे हैं

ये सच है सच हर बार किसी को तोड़ ही जाता है
हाँ ये सच है कुछ झूठी मुस्कानों से ही पल रहे हैं

माना झूठ एक दिन हमे बहुत रुलाएगा, छोड़ जायेगा
तो क्या सच की बदौलत हर रोज़ हम बे-मौत मर रहे हैं

हर सच जानते हैं हम, हमें अपनी कसम
फिर क्यों झूठी उम्मीदों के सहारे बढ़ रहे हैं 

झूठ आज भी दिल को क्यूँ सुकून पहुंचता है 
सच आज भी क्यूँ हमें नाउम्मीदी में जकड़ रहे हैं

सच ये भी की सच और झूठ में फर्क है अब कहाँ
सच ये भी की हालात सच-झूठ के मायने बदल रहे हैं

छोड़ दो हमें झूठे हौसलों की बातें बताना
हम छोड़ते हैं सच्ची कहानियाँ जो गढ़ रहे हैं