हर किसी का अपना दर्द अपनी ही सजा है
कोई खुद से खफा कोई हालात से गमज़दा है
कुछ ख्वाहिशों ने भी तोड़ी है हमारी उम्मीदें
वर्ना अँधेरा कब सुबह के कहने पे रुका है
कुछ रिश्ते खुद-ब-खुद ही टूट जाते
हर बार गलतियों की नहीं होती खता है
अब दर्द खुद को कुछ गुनगुना चाहता है
खामोश रहने की इसे मिल चुकी सजा है
अश्क दिल की ही एक आवाज है
जहन से कहाँ कोई इसका रिश्ता है
न जाने कब कोई तारा सुस्ताना चाहे
आँगन आज भी हमने खुला ही रखा है
कोई खुद से खफा कोई हालात से गमज़दा है
कुछ ख्वाहिशों ने भी तोड़ी है हमारी उम्मीदें
वर्ना अँधेरा कब सुबह के कहने पे रुका है
कुछ रिश्ते खुद-ब-खुद ही टूट जाते
हर बार गलतियों की नहीं होती खता है
अब दर्द खुद को कुछ गुनगुना चाहता है
खामोश रहने की इसे मिल चुकी सजा है
अश्क दिल की ही एक आवाज है
जहन से कहाँ कोई इसका रिश्ता है
न जाने कब कोई तारा सुस्ताना चाहे
आँगन आज भी हमने खुला ही रखा है