एक शख़्स हर बात पर
कहता मिला ‘और भी’
लोग पूछते कुछ पर जवाब
आता ‘और भी’
कुछ ने समझा बेबस, कुछ
ने दीवाना उसे
पर आदमी की शक्ल में
आदमी था कुछ और ही
हर बात पर दुआएँ देते
जाने वाला
लोगों को कहता दिल खोल
दो दुआएँ और भी
ज़ख़्म खाता हर दर्द पर
चीख़ जाता
पर हर दर्द पर चिल्लाता
एक दर्द और भी
दवा की पोटली के बोझ का
मारा हुआ
झोली फैलाये कहता दे
दवा कुछ और भी
कुछ देख उसे ‘आह’ कह गए
कुछ ‘वाह’ कह गए
पर कहता रहा वो ‘और भी’
‘और भी’ ‘और भी’
वह कहेता रहा नही अभी अभी
ReplyDeleteकहेता आया वो लदीयों से
लेलो दूआ और भी देदो ये ऐर भी
जखम देने वाले देते रहे नही ठके फीर भी
अेक अकेला दूआ रहा देता रहा फीर भी
कोई देता जखम कोइ देता दूआ
फर्क सिर्फ इतना नही जखम या दुआ देना
अेक था शैतान तो अेक फीर फरिस्ता
अरे दोस्त हीमन रामने सही कहा
कोन शैतान ?? कोन फरिस्ता ??
रुदय चीर के देख तेरे ही भीतर दोनों बैठे
इस कोणे शैतान तो उधर है...फरिस्ता
देखे जमाना तुंही दे जखम तूंही खाये जखम
तूंही दैता आह तो तूंही लेता वाह
चीखने चीखाने की कसम तूं नीभाता
वही दूआ उपर दूआ तूंही देता रहा
वाह रे उपरवीले कमाल क्या तेरा
जीसे बनाया शैतान उसे ही बनाया फरिस्ता
यही करता पाप तो पुन्यं भी उसीका
दीन भी तेरा रात भी तेरी