अजीब कश्मकश में है ये ज़िंदगी
सच बोले तो दोस्त रूठे, झूठ से हम टूटे
बहुत मुश्किल है कुछ बातों को बताना
जिन्हें बस हम समझे, जिन्हें बस हम बूझे
वक्त की गुस्ताखियों का क्या कहे
हमें कहे तुम झूठे, और फिर हमें लूटे
कुछ मसले अब ऐसे भी हैं सुलझाते
मान लेते हैं न हम सच्चे, न वो झूठे
दिन झगड़ों का दोस्ती में हमें गवारा है
पर साँझ किसी का न दिल टूटे न वो रूठे
Dedicated to all my friends from KV2 Youngsters group, Ambala Cantt....
सच बोले तो दोस्त रूठे, झूठ से हम टूटे
बहुत मुश्किल है कुछ बातों को बताना
जिन्हें बस हम समझे, जिन्हें बस हम बूझे
वक्त की गुस्ताखियों का क्या कहे
हमें कहे तुम झूठे, और फिर हमें लूटे
कुछ मसले अब ऐसे भी हैं सुलझाते
मान लेते हैं न हम सच्चे, न वो झूठे
दिन झगड़ों का दोस्ती में हमें गवारा है
पर साँझ किसी का न दिल टूटे न वो रूठे
Dedicated to all my friends from KV2 Youngsters group, Ambala Cantt....