Friday, 5 August 2016

अंजलि

मेरी थी एक सहेली
नाम जिसका था अंजलि
अंजलि की दुःख भरी कहानी
जो मै आप सबको चाहती सुनानी।

माँ बाप में उसके तलाक़ हो गया
और उसके पास ना कोई रह गया
वो अपनी माँ के पास जाना चाहती
पर वहाँ एक नए पिता को पाती।

उसके पिता ने भी यही काम किया था
उसके लिया एक माँ ले लिया था
दिन भर वो रोती ही रहती
और लोगों से कुछ दूर ही रहती।

पर अपना दुःख नहीं दिखाती  
किसी को कुछ भी तो नहीं बताती
पर एक दिन रो पड़ी वो मेरे आगे
और बोली तू मुझे बचा ले।

मै अपने घर नहीं जाऊँगी
यहीं स्कूल में मर जाऊँगी
थी मेरी हर कोशिश बेकार
मै भी थी उसे देख लाचार।

समझ मुझे कुछ नहीं आ रहा था
और उसका हाल भी नहीं देखा जा रहा था
समझा-बुझा उसे अपने घर में लाई
और अपने माता पिता से मिलवाई।

मेरी माँ ने उसे बहुत समझाया
फिर कुछ लोगों से मिलवाया
मन उसका ज़रूर कुछ हल्का हुआ था
उसके चेहरे पर एक मुस्कान भी दिखा था।

चल दी वो मेरे घर से ख़ुशी ख़ुशी
और मुझे भी काफ़ी तसल्ली मिली
पर दो महीने बाद उसका एक पत्र आया
जिसमें उसने था ये बताया।

जब तक तू ये पत्र पाएगी
मौत मुझे कहीं दूर ले जाएगी
उसने आत्म-हत्या कर ली थी
अपने दुखों से मुक्ति ली थी।

मै कुछ समझ नहीं पा रही थी
कि ये दुनिया किस तरफ़ जा रही थी
उसने क्या क़सूर किया था
के लोगों ने उसे ये सज़ा दिया था।

क्यूँ उसके माँ बाप समझ नहीं पाए
जब उसे दुनिया में लाए
उसने तो चाहा था सिर्फ़ इतना
उसे भी मिले प्यार अन्य लोगों जितना।

जी तो चाहता था चीख़ूँ चिल्लाऊँ
उसके माँ बाप को रो रो कर बताऊँ
क्यूँ तुमने आपस में शादी किया
जब तुम्हें रहना था एक दूसरे से जुदा।

किसने तुम्हें ये अधिकार दिया था
कि तुमने उसे ऐसे अलग किया था
उसकी ज़िंदगी उसकी ही थी
क्यूँ तुमने उसमें ज़हर घोल दी।

उसने पत्र में था लिखा
अनु तुम कभी शादी न करना
और कर ले तो मत झगड़ना।

मै जानती हूँ तू मुझसे ग़ुस्सा होगी
पर मेरी हालत को तू क्या समझेगी
मैंने क्या ज़िंदगी में भुगता
मै ही जानती रहूँगी सदा।

भगवान कभी वो दिन न लाना
जब बच्चों को पड़े इस राह पर जाना
बच्चे भी हर दुःख दर्द सह लेंगे
अगर वो माँ बाप के साथ रहेंगे।

अगर एक परिवार भी मैं सकी बचा
तो समझूँगी मेरा लिखना सफल हुआ
हर माँ बाप से मैं ये ही चाहूँगी
कभी हो न वो एक दूसरे से जुदा।

कहीं अंजलि जैसी आपकी कोई बेटी न हो
जो रातों को सिर्फ़ रोती रहती हो
आपस के मतभेद सुलझाये जा सकते हैं
हर रिश्ते में प्यार लाये जा सकते हैं।

इसलिए आप सबसे मेरा है अनुरोध
कभी आपस में करना ना विरोध
ये विरोध ऐसा दिन न दिखा दे
अंजलि से हमेशा के लिए बिछुड़ा दे।

4 comments:

  1. Chchote aur ekaaki parivaar mein aisi dukhad ghatnaen mainne bhi dekhi hai. Divorce kai baar juruuri ho jati hai magar aisi ghatna bachchon ke liye bahut/bhayankar piidadaayak hoti hai aur unpar bahot khatra bhi rahta hai. Mainne dekha hai ki sanyukt parivaar mein jab aisi ko baat hoti hai to bachche aasaani se sambhal jaaten hai.

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    1. आपकी बात से सहमत हूँ। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। ये सिर्फ़ एक पक्ष है, मै ख़ुद मानती हूँ लड़ के साथ रहने से अच्छा है ख़ुशी ख़ुशी अलग हो जाये। अशांत माहौल का भी बच्चों में उतना ही बुरा असर होता है। अंजलि के बहाने सिर्फ़ ये कहना चाहती हूँ कि परिवार का माहौल बच्चों के लिए ज़रूरी हैं। बाक़ी सबकी अपनी कहानी है और सबका अपना हक़ीक़त।

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  2. आपकी यह मार्मिक कविता हमें जीवन जीने के सलीक़े सिखा गई। परिवार की आंतरिक कलह-उलझन सबसे पहले उस घर के बच्चों को प्रभावित करती है।

    भाग-दौड़ की इस ज़िंदगी में हमारे लिए कई स्तरों पर संयम की आवश्यकता होती है।

    अच्छी और संवेदनायुक्त कविता है।

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    1. शुक्रिया, पर जैसा पहले लिखा ये सिर्फ़ एक पक्ष है।

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