Tuesday, 23 August 2016

शतरंज के क़ायदे ज़िंदगी में कब काम आते हैं

शतरंज के क़ायदे ज़िंदगी में कब काम आते हैं
ज़िंदगी में लोग अपनों से ही तो मात खाते हैं।

ऐसे दरख़्त जो फल दे पाते नहीं
सरसब्ज होते हुए भी पहले काटे जाते हैं।

बेइन्तहा अल्फ़ाज़ों की इस दुनिया में
लफ़्ज़ भी ख़ामोशी से हार जाते हैं।

ज़िंदगी सुबह और शाम का ही तो एक नाम है
ख़ुद को सुबह रौशनी और शाम अंधेरे में पाते हैं।

रफ़ू भी उन लिबास या इंसान का हो पता है
जो मज़बूती से टूट कर भी खड़े नज़र आते हैं।

2 comments: