बचपन में एक बार लौट कर
जायें
छोटी छोटी बातों से
ख़ुद को हँसायें
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
जद्दो-जहद भरी ज़िंदगी
से
कुछ पल अपने लिए
चुरायें
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
छोटी छोटी ख़्वाहिशों
को
बड़ी बड़ी शक्लों में
अपनायें
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
प्यासे परिंदों को पानी
पिलाकर
कुछ तो क़दम आगे
बढ़ायें
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
कुछ बोल तोतले बोल कर
कुछ रूठो को ही मनायें
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
बेबसी के इस दौर में
कुछ उदासी को छुपाएँ
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
मंज़िल ही तो सौग़ात
नहीं
हर छोटी सौग़ात को
सराहें
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
वक़्त के क़ैद से ख़ुद
को छुड़ाकर
अब वक़्त से इतना ना
घबराएँ
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
ज़िंदगी का मक़सद एक हो
हम सभी को ख़ुशी दे
पायें
चलो एक बार फिर ख़ुश हो
जायें
Simple, sober, and beautiful poem. Thank you so much for sharing such a lovely poem.
ReplyDeleteThanks from bottom of my heart ...you have used such lovely adjectives to describe your feeling for this poem ...well I have very limited word stock both in English and Hindi .. May be that makes it simple
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