इन आँखों को अब समझा दो
वो न आयेंगे ये इन्हें बता
दो।
ज़िंदगी कुछ आराम चाहती
है
उम्मीदों के दीये तो बुझा
दो।
जिन लोगों की मौजूदगी
तुम्हें रुलाती है
ऐसे इंसानों को ज़िंदगी
से अपनी हटा दो।
बीती बातों को भूलना ही
अब मुनासिब है
ज़िंदगी की किताब से
कुछ कहानियाँ भुला दो।
बहुत हुआ दर्द का
अफ़साना
कुछ लतीफ़े ही अब सुना
दो।
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