Wednesday, 10 August 2016

ये हालात मुझे भी कहाँ समझ आते हैं

चलो ज़िन्दगी में कुछ नए मुकाम लाते हैं
पुराने अफसाने को कुछ देर के लिए भूल जाते हैं

लोग मेरी बातों का मतलब निकाल रहे हैं
सच तो ये है ये हालात मुझे भी कहाँ समझ आते हैं

लोग जीने का हुनर सीख रहे हैं
हम मरने का शौक आज भी फरमाते हैं

कुछ ख्यालों से निजात पाये भी तो कैसे
तन्हाई में ये आ-आ कर हमें कितना सताते हैं

भरोसा जिनका खुद पर ही नहीं रहा
लोग उनसे ज़िन्दगी के मायने पूछने चले आते हैं


2 comments:

  1. अनुभवी लोगों से ही तो जीवन जीने के गुर सिखना होता है। इसलिए अने दीजिए लोगों को अपने हालात पर रोने।

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    1. अनुभवहीन इंसान अनुभव लाए भी तो कैसे!!!

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