चलो कुछ फ़ासले हाथ
बढ़ा कम करे
दिल से कहें तुम ख़ुश
रहो हम भी ख़ुश रहें।
जी चाहता है हम कहीं खो
जायें
हमारा नाम भी गुमशुदा
लोगों में रहे।
क्या गिला उनके खो जाने
का
जो कभी हमारे न थे, न
रहे।
अब क्या करे ऐसे लोगों
का
जो बिना सुने हर बात
समझ रहे।
बिछड़ने का ग़म कब हमें
है
ग़म है बिछड़ते हुए हम
ख़ामोश रहे।
अच्छा है, जब जुदाई हो गई तो ख़ामोशी में ही चैन है। पहले की बेचैनी भी दूर होगी।
ReplyDeleteफिर भी मिलन और वियोग की यह हार्दिक क्रीड़ा चलती ही रहती है।
कुछ बातों को मान कर आगे बढ़ते जाना ही ज़िंदगी है।
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