Friday, 5 August 2016

चलो कुछ फ़ासले हाथ बढ़ा कम करे

चलो कुछ फ़ासले हाथ बढ़ा कम करे
दिल से कहें तुम ख़ुश रहो हम भी ख़ुश रहें।

जी चाहता है हम कहीं खो जायें
हमारा नाम भी गुमशुदा लोगों में रहे।

क्या गिला उनके खो जाने का
जो कभी हमारे न थे, न रहे।

अब क्या करे ऐसे लोगों का
जो बिना सुने हर बात समझ रहे।

बिछड़ने का ग़म कब हमें है
ग़म है बिछड़ते हुए हम ख़ामोश रहे।

2 comments:

  1. अच्छा है, जब जुदाई हो गई तो ख़ामोशी में ही चैन है। पहले की बेचैनी भी दूर होगी।


    फिर भी मिलन और वियोग की यह हार्दिक क्रीड़ा चलती ही रहती है।

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    1. कुछ बातों को मान कर आगे बढ़ते जाना ही ज़िंदगी है।

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