Sunday, 7 August 2016

बात बदल दी

कितनी आसानी से उन्होंने हर बात बदल दी
हमने हालत बताये उन्होंने सवालात हमारे ऊपर जड़ दी।

अपनी नासमझी पे हम आज भी शर्मिंदा हैं
पर उन्होंने अपनी कमज़ोरियाँ भी हमारे सर मड़ दी।

बस कुछ सवाल ही तो ज़िंदगी के थे पूछे
जवाब में कितनी सारी किताबें हमारे हाथ में धर दी।

हम तो आज भी अनजान है दुनिया के रस्मों सें
आज फिर उन्होंने दुनियादारी का पाठ हमारे सामने पढ़ दी।

कब तक जूझते रहे हम अनसुलझे सवालों से
लो हमने भी उल्टे-सीधे जवाब ज़माने के लिए गढ़ दी।


3 comments:

  1. यही होता आ रहा है मैडम, करता एक है, भरते सभी हैं।

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  2. सही होता है मैडम, करता एक है, भरते सभी हैं।

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    1. पर नहीं होना चाहिए।

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