Wednesday, 3 August 2016

न मंज़िल चाहिये ना रास्ता

उस ज़ख़्मी दिल को मंज़िल चाहिये ना रास्ता
उसका ज़ख़्म कैसे भरे कोई उसे बस इतना दे बता

वो जो आँधियों से सब कुछ हार बैठा है
उसे कुछ नहीं तो एक आशियाने का दें आसरा।

चाँद और आसमान छूने का इरादा मुबारक हो तुम्हें
पर एक इरादा ऐसा भी जो भूखे बच्चों को पेट भरकर दे सुला।

ये दर्द उसका है जो उसकी चीख़ो में आ रहा है
मत रूठ उससे हो सके तो दर्द पर कुछ मरहम दे लगा।

इस क़दर टूट कर उनको चाहा कि हम ये भूल गये
प्यार हमको भी चाहिए हम भी रूठे तो कोई हमें भी ले मना।

3 comments:

  1. जखम नाम दुख की परिभाषा के लीये काॉफी है,जीस व्यक्ति को जखम मीलता है वो आजीवन नही भूल लकता फीर चाहे देनेवाला अपना हो या पराया,उसमेें भी अपनोनें दीये जखम कभी कोई नही भूल सकता,अच्छा हैं मनाने की बात का मरहम,व प्यार में पडने से जीवन जीनेकी ख्वाइस बना रक्खी है ....... very nice.good day ji

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