वक़्त पर वो कभी आते नहीं
वजह पूछो तो बताते नहीं।
क्या वफ़ाई हमारी ही
जागीर है
लो अब हम वफ़ा निभाते
नहीं।
सफ़र का वो मोड़ रास्ता
दिखा ही नहीं
और वो रूठे ऐसे बोलो हम
बताते नहीं।
बात फिर उनकी जो बिछड़े
पिछले बरस
क्यूँ ज़िक्र उनका जो
अब याद आते नहीं।
क्या बात करे उनकी
चाहतों का
पुरानी बातों को अब हम दोहराते
नहीं।
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