लोग सलीके की बात करते हैं
ज़ख़्मी पैरों से पूछो वो कैसे चलते हैं
बे-हिल हो चुकी इस ज़िन्दगी में
लोग दिखावे के लिए इल्म की किताबें लिए फिरते हैं
किसी पर किसी बात का असर होता नहीं
लोग फिर भी अपनी बातों का कितना दम भरतें हैं
वो यादें जो मुस्कान दे होँठो पर बिखेर
ऐसे गुजरे पलों में ही तो ज़िन्दगी के मायने बसतें हैं
वो कहते है इश्क दर्द का नाम है
तो दर्द के लिए क्या लोग इश्क करते हैं?
दिन पे दिन दुशवार होती ज़िन्दगी में
कुछ रूहानी पल दोस्तों के बीच ही मिलते हैं
वास्तव में इश्क़ का कोई मुक्कमल पैमाना अब तक नहीं बन पाया है। परेशानी तभी होती है, जब एक-दूसरे पर मर-मिटनेवाले एक-दूसरे को मारने-मिटाने की स्थिति पैदा कर लेते हैं, करा दिए जाते हैं।
ReplyDeleteलेकिन इश्क़ करना तो सुफियों से सिखना चाहिए....
हमें तो न ये समझ आता है और न समझा सकतें हैं तो बस लिख दिया।
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