Friday, 19 August 2016

ख़्वाहिश

ख़्वाहिशें ही तो ज़िंदगी को जान देती हैं
ख़्वाहिशें ही तो ज़िंदगी की जान लेती हैं।  

वक़्त के साँचे में ढलने को मजबूर है इंसान
ख़्वाहिशें ही इंसान को कुछ पहचान देती हैं।

सैकड़ों ख़्वाहिशों की दुनिया की है ये ज़िंदगी
सो चुकी ख़्वाहिशें भी ज़िंदगी को अरमान देती हैं।

बहुत तड़पाती है अधूरी ज़िंदगी की कुछ ख़्वाहिशें
कई बार ऐसी ख़्वाहिशें ज़िंदगी को शमशान देती है।

न हो पूरी ख़्वाहिश तो तू एक और जगा
ख़्वाहिशें ही तो ज़िंदगी को जीने का सामान देती है।

ख़्वाहिशों से शुरू और ख़्वाहिशों पर ही ख़त्म
ख़्वाहिशें ही ज़िंदगी को ज़िंदगी का पैग़ाम देती है।

2 comments:

  1. जान देती है तोलेती भी
    ये कमबक्त देती पहचान
    सेंकडो मजबूर जिंदगी को
    करती नहीये पूरा अरमान
    समसानकी ये कराती सफर
    जो जीयाजीता वो सीकंडर
    मरगया जो उसका मुक्दर
    ख्वाइश से शुरु ये जिंदगी
    उसी की ही आहत में पूरी
    फीर भी मीठी जबान ने
    बता दीया देती पैगाम जिंदगी
    का......
    सलाम
    बहोतखूब
    धन्यवाद

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    1. आपको पसंद आया .. शुक्रिया

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