न मुँह में जुबान न आँखों में पानी है
ये ज़िन्दगी की नहीं मौत की कहानी है
वक्त हर चीज़ की कीमत चाहेगा
ख़ामोशी की अपनी बहुत पशेमानी है
हर बात खामोशी से सुनते रहना
कुछ तो इसमें आज भी बेमानी है
खुद के लिए ही कुछ बोलिये
वक्त की ज़रूरत अब बयानी है
बहुत चुप थे अमन की खातिर
चुप रहने से ही अब सारी परेशानी है
अपने ज़ख्म से हर दर्द तोल रहे
ये कैसी सूरत ये कैसी ज़िंदगानी है
Good good
ReplyDeleteThanku Thanku....
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