किसी को चाहने से कुछ होता कहाँ है
किसी के कहने से कोई रोता कहाँ है
सुबह की उम्मीद अपनी जगह पे
शाम की शादगी सुबह ढोता कहाँ है
परिंदों को माना खुला आसमान चाहिए
परिंदा आसमान में पर सोता कहाँ है
खुद से वादा था मुड़ के न पीछे देखेंगे
यादों को दिलों से पर कोई खोता कहाँ है
वो दामन को छू के चला गया
वो दाग़ पर वक्त धोता कहाँ है
किसी के कहने से कोई रोता कहाँ है
सुबह की उम्मीद अपनी जगह पे
शाम की शादगी सुबह ढोता कहाँ है
परिंदों को माना खुला आसमान चाहिए
परिंदा आसमान में पर सोता कहाँ है
खुद से वादा था मुड़ के न पीछे देखेंगे
यादों को दिलों से पर कोई खोता कहाँ है
वो दामन को छू के चला गया
वो दाग़ पर वक्त धोता कहाँ है
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