Saturday, 17 March 2018

बिन बात भी कभी रुठिये-मनाइये

बिन बात भी कभी रुठिये-मनाइये 
बिन मतलब भी कभी हँसिये-हंसाइए

दोस्ती में तकल्लुफ़ शामिल नहीं जनाब
बिन बात दोस्तों  को सताइये-बहलाइये 

सुबह और शाम से बंध गई है ज़िन्दगी 
कभी दिन और रात को भी हंसाइए-रुलाइये 

क्या हुआ जो कुछ ख्वाब फिर टूट गए 
बेधड़क कुछ और भी संवारिये-सजाइये 

ज़िन्दगी से बोरियत जाएगी ज़रूर 
बिन मौके भी दोस्तों को बुलाइये-बिठाइये 

डर कर किसी को कोई बदला है भला 
ज़िन्दगी को कभी आप भी डराइए-धमकाइये

4 comments:

  1. बेहतरीन पंक्तियां

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  2. Whats your addess Anita Jha ! Will meet you one day ! Without any work ? 😴😴😴😴😴

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  3. You have that .. anytime any day .. most welcome ..🙏🙏🙏😀😀😀

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