हमारे मुस्कुराने से ही ये भी मुस्कुराते हैं
अजनबी की तरह ही वक्त रिश्ता निभाते हैं
माना आंधियां कुछ देर में चली जाएगी
पर इन की बर्बादियों में हम उम्र बिताते हैं
जब जवाब आया तो सवाल खो गया
और लोग समझते हैं हम यूँ ही मुस्कुराते हैं
एक उम्मीद ही अब तक ज़िंदा रक्खे है
ज़िन्दगी के अच्छे दिन बस अब आते हैं
किसी से शिकायत हमारी अब खो गई
सबसे ज्यादा हम ही तो खुद को सताते हैं
खुदा हर ज़ख्म के दाग मिटा दे
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