टूटे दिल को फिर सजा लीजिये
टूटे टुकड़ों को इनाम बना लीजिये
पछताने से कुछ हासिल होगा नहीं
खुद को कुछ वक्त कुछ हौसला दीजिये
ज़िन्दगी है देखिये कहीं बहक जाएगी
पैरों को अब रास्तों का पता दीजिये
ख्वाहिशें खुद काम करती कहाँ हैं
अपने वज़ूद का इन्हें हवा दीजिये
गलतियों से इतना घबराना कैसा
कुछ इल्ज़ाम किस्मत पे लगा दीजिये
टूटे टुकड़ों को इनाम बना लीजिये
पछताने से कुछ हासिल होगा नहीं
खुद को कुछ वक्त कुछ हौसला दीजिये
ज़िन्दगी है देखिये कहीं बहक जाएगी
पैरों को अब रास्तों का पता दीजिये
ख्वाहिशें खुद काम करती कहाँ हैं
अपने वज़ूद का इन्हें हवा दीजिये
गलतियों से इतना घबराना कैसा
कुछ इल्ज़ाम किस्मत पे लगा दीजिये
Wah behtreen
ReplyDeleteShukriya
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