किसी को मानाने में रूठना भूल गए
किसी को हँसाने में हम और टूट गए
ज़िन्दगी तो बस धक्के से चल रही है
पहचाने रास्ते कब के पीछे छूट गए
दस्त-गीरी* में हाथ हर बार थे बढे
किसी की मड़ोड़ से ये भी रूठ गए
किस बात की शिकायत किस बात का गिला
कांच के थे पैमाने वक्त के साथ सब टूट गए
अब खुद से और कितनी दुश्मनी निभाएं
मान लिया वक्त और हालात हमें लूट गएँ
दस्त-गीरी - हाथ बढ़ाना
किसी को हँसाने में हम और टूट गए
ज़िन्दगी तो बस धक्के से चल रही है
पहचाने रास्ते कब के पीछे छूट गए
दस्त-गीरी* में हाथ हर बार थे बढे
किसी की मड़ोड़ से ये भी रूठ गए
किस बात की शिकायत किस बात का गिला
कांच के थे पैमाने वक्त के साथ सब टूट गए
अब खुद से और कितनी दुश्मनी निभाएं
मान लिया वक्त और हालात हमें लूट गएँ
दस्त-गीरी - हाथ बढ़ाना
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