आईने से झूठ बुलवाना चाहते हो
आईने से झूठ बुलवाना चाहते हो
आप खुद का सच छुपाना चाहते हो
वक्त के साथ कुछ बदलेगा नहीं
फिर किस लिए ये बहाना चाहते हो
हर बात क्यूँ पर जा खड़ी हुई
खुद को कितना सताना चाहते हो
जिसे आपने संजोया ही नहीं
आप वो खजाना चाहते हो
वक्त का लिखा कुछ मिटता नहीं
आप वक्त को सिखाना चाहते हो
No comments:
Post a Comment