Saturday, 7 January 2017

ज़िन्दगी से अब क्या छुपाना

ज़िन्दगी से अब क्या छुपाना 
पर ज़िन्दगी को अब क्या बताना 

उस बात को हम रहे छुपा 
जिसे मुश्किल है भूल जाना 

हर दर्द हमने था छुपा लिया 
था अजीब आँखों का बोल जाना 

प्यार पाया भी तो उस जगह
जहाँ था मुश्किल प्यार निभाना

आदमी वो नहीं जो दिख रहा है 
बहुत मुश्किल है उसके अंदर जाना

ज़ख़्म छुपाने के लिए रहे हो मुस्कुरा  
अच्छा है ज़ख्म भरने के लिए मुस्कुराना 

सबकी नज़रों से तो खुद को छुपा लिया है 
पर बहुत मुश्किल है खुद से खुद को छिपाना 

हर बार आँखें छलक आई 
जब भी हमने चाहा मुस्कुराना 




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