तमाशा ही तो मक़सद था बाक़ी हर बात हो गई
उस अँधेरी रात के साथ
हर बात ख़ुद में खो गई
वो जो चीख़ते थे दूसरों
की नाकामियों पर
एक हार से उनकी आवाज़ किस
क़दर सो गई
तमाशा देखने की ख़्वाहिशें
हर वक़्त ख़ुद में सजोयें
ख़ुद की ज़िंदगी के
तमाशे से ये बात भी पूरी हो गई
ये आँधी हमने ख़ुद ही तो
है बनाई
क्या गिला बारिश हमारे
घर को डुबो गई
तमाशा से ऊपर उठने
की है अब तमन्ना
ज़िंदगी की मासूमियत तमाशे में खो गई
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