कुछ लोग ज़िंदगी में सिर्फ़ रुलाने आते हैं
मालूम नहीं ऐसा कर वो क्या सुकून पाते हैं
लो मान ली हर हार हमने
अपनी
अब आप और क्या जितना
चाहते हैं
हर बार वक़्त के पीछे
ख़ुद को छुपा
हर वक़्त वक़्त की ही वो
बात बनाते हैं
जो जानते नहीं हम पे
क्या गुज़री है
तो क्यूँ झूठी हमदर्दी का
तोहफ़ा छोड़ जाते हैं
अब तो हमें माफ़ कर
दीजिए जनाब
ज़िंदगी के दाँव-पेंच
हम कब सिखाना चाहते हैं
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