ज़िंदगी अब तेरे चलाये ही हम चलेंगे
तेरे किसी बात पर जिरह न अब करेंगे
तू ख़ुश रहे तेरी ख़ुशी
के ख़ातिर
अपनी हँसी भी गिरवी
रखवा देंगे
एक आस एक प्यास एक
विश्वास
उम्मीदों के ये दीये अब
बुझा देंगे
सर-ब-सर राह भी मंज़िल
न खोज पाएगी
उन राहों पर आज कुछ
दीवारें बनवा देंगे
चश्म-ए-ग़म भी अब बस
मुस्कुरायेगी
देखना आखों से हम ख़्वाब
हटा लेंगे
अपने हालात पर अब हम
क्यूँ कर शर्मायें
अपनी जीत को आसानी से हार
बना लेंगे
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