Tuesday, 10 January 2017

ज़िंदगी अब तेरे चलाये ही हम चलेंगे

ज़िंदगी अब तेरे चलाये ही हम चलेंगे
तेरे किसी बात पर जिरह अब करेंगे

तू ख़ुश रहे तेरी ख़ुशी के ख़ातिर
अपनी हँसी भी गिरवी रखवा देंगे

एक आस एक प्यास एक विश्वास
उम्मीदों के ये दीये अब बुझा देंगे

सर-ब-सर राह भी मंज़िल न खोज पाएगी
उन राहों पर आज कुछ दीवारें बनवा देंगे

चश्म-ए-ग़म भी अब बस मुस्कुरायेगी
देखना आखों से हम ख़्वाब हटा लेंगे

अपने हालात पर अब हम क्यूँ कर शर्मायें
अपनी जीत को आसानी से हार बना लेंगे



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