टूटे दिल से ज़िंदगी कैसे गुजारें
टूटे आईने से चेहरे कैसे निखारें
बहुत मुश्किल है उन ख़्वाबों को भूल जाना
जिन्हें बचपन से हमने ज़िंदगी मान सँवारें
हर एक यक़ीन आज हम तोड़
आयें हैं
हमारी ज़िंदगी बे-दर-ओ-दीवार
के सहारे
अजीब शख़्स था हमें
हमारे सामने तोड़ गया
और हम फिर भी देखते रहे
उसे बेबस बेचारे
अपनी हर बात को तो हमने
ही झुठला
पर सच ये है की दिल से
हम भी हैं हारे
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