अब हम चाहतों से बहुत दूर जाना चाहते हैं
चाहतों से किसी की अब हम तो घबरातें हैं
हर वो चीज़ जो दिल को तकलीफ़ देती हैं
हम उसे ज़िंदगी में भूल ही जाना चाहते हैं
एक बार तो दिल भी उसे
झूठ मान ले
वो सच जिसे अब हम
झुठलाना चाहते हैं
कुछ बातों को भूल जाओ
कुछ लोगों से दूर जाओ
ये बात फिर से ख़ुद के
लिए दोहराना चाहते हैं
अब हम ज़िंदगी में नफ़रत
से क़तई काम नहीं लेंगे
हमें मालूम हैं दुश्मन दोस्त से
ज़्यादा याद आते हैं
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