होने और न होने के
दरम्यान क्या होगा
क्यूँ सोचे इतना, भला
होगा या बुरा होगा।
तमन्नाओं से कहाँ किसी
को कुछ हुआ हासिल
जिसको जो मिला काम उसने
कुछ किया होगा।
दर्द जिस्म का था और आप
सह न पाए
आज रूह टूटा है सोचिए
हाल मेरा क्या होगा।
चीख़ मेरी क्यूँ लौट कर
वापस आ गई
आज लगा खुदा भी शायद
बहरा होगा।
न ख़्वाब न ख़्वाहिशें
हैं इस ज़िंदगी में
वक़्त इससे भी किसी का
क्या बुरा होगा।
अब जी नहीं करता कोई
ज़ख़्म मेरा देखे
सब देखतें हैं पर समझ
कहाँ कोई रहा होगा।
चल लौट चल तू फिर दिल
की वीरानियों में
महफ़िल में दिल से कहाँ
कोई सुन रहा होगा।
उन के घर से हम बोरियाँ
बिस्तर समेट तो लायें
पर लगता है किसी कोने
में यादों का कुछ निशाँ होगा।
ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
ReplyDeleteइन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है
खुदा भी उसी की सुन रहा है
ReplyDeleteजिसने भी ख़ुद कुछ किया है
Beautiful thoughts expressed in a simple language .
ReplyDeleteThanks a lot.
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