ज़िंदगी से हम बंध कर ही क्यों रहें
ज़िंदगी ने ऐसे कौन से करम
हमपे किये ।
बेवफ़ा है ज़िंदगी
बेवफ़ाई इसका काम है
तो हम क्यूँ बा-वफ़ा बन
के ही जियें।
ज़िंदगी अपने दामन में
दर्द ही है छुपाए
देखते हैं मौत क्या
सौग़ात हमारे लिए है लिये।
न आते हम जहाँ में तो क्या
होता
ये सवाल भी ख़ुद में एक
जवाब है लिये।
चलो अब कुछ मौत को ही
हैं सजाते
ज़िंदगी ने तो हर अरमान
हमसे ले लिये।

गर शाम आयी है तो सुबह का इंतज़ार करो
ReplyDeleteवक़्त अपना है उस वक़्त पर ऐतबार करो
अपनी चाहत, अपना हुनर,अपने भरोसे का न व्यापर करो
ज़िन्दगी हसीं है इस ज़िन्दगी से प्यार करो
वक़्त हर बार रूप बदल कर आता है
Deleteख़ुशी के नक़ाब में ये ग़म भी लाता है