Wednesday, 21 December 2016

हवा से लड़ कर आँधियों को मत बुलाओ

हवा से लड़ कर आँधियों को मत बुलाओ
कुछ ज़ज़्बातों को महफिल में मत दिखाओ

इश्क़ पेशा हो गया है ज़िन्दगी के बाजार में
मोहब्बत बन तुम भी मेरी दुनिया में मत आओ

जिनको ज़ज़्बातों की भी कोई कदर नहीं
ऐसे लोगों को जज़्बात--दिल मत दिखाओ

जो राह--मंज़िल की तलाश में है भटका हुआ
खुदा के लिए उन्हें राह--मुश्किलें मत समझाओ

जो कहते कुछ और हैं और करते कुछ और हैं
ऐसे लोगों की बातों में तो कम से कम मत आओ

समझ किसी बात की सोच से ही तो आएगी
सच और झूठ में ही किसी बात को मत अपनाओ

अब हमें ये चिंता कहाँ कोई क्या सोचता है
तुम लोगों की बातों से अब हमें और मत डराओ

माना हम गलत थे पर तुम साथ तब थे कहाँ
अब सच्चाई का ये पाठ भी हमें मत पढ़ाओ

सबकी सोच ले कर कौन चल सकता है भला
तो दूसरों के ख़यालात से ज़िन्दगी मत बनाओ

हर किसी ने अपनी एक पहचान है पाई
किसी और के जैसा खुद को मत सजाओ

जब जानते नहीं की हम किस रह पे थे चले
तो अपने किस्सों को हमारे किस्सों से मत मिलाओ

ये डर भी देखना कुछ अच्छा ही कर जायेगा
तुम डर की सोच और अब डर से मत घबराओ

मोती कहीं किस को साहिल पे मिला है भला
तुम किनारे बैठ मोतियों की उम्मीद मत लगाओ

वो बात क्यूँ सोचे जो बस में किसी के नहीं
उल्टे- सीधे  ख़यालात जहन में मत बसाओ

कुछ तलाश मौके की भी है ज़रूरी ज़नाब
मौके की उम्मीद में बैठकर वक्त मत गँवाओ

माना ज़िन्दगी के कुछ पन्ने तुम्हे रुलाते हैं
ऐसे पन्नों को ज़िन्दगी की किताब में मत सजाओ

सच एक रोज देखना खुद ही सामने आयेगा
तुम झूठ से अब इतना भी तो मत घबराओ




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