माँ ने आँचल में कुछ सिक्के बाँध रखे हैं
बच्चों की ख़ुशियों के साथ सामना रखे हैं।
बोझ बस्ते के बच्चें उठायें कैसे माँ के सामने
माँ ने बच्चों के स्कूल-बैग कंधे पे टाँग रखे हैं।
हर वक़्त सहलाया था माँ ने जिन हाथों को
सड़क-पार करते हुए उसे ज़ोर से थाम रखे हैं।
बच्चों की आह पर नींद चैन उसने गँवाई
आँखों ने उसकी बच्चों के ख़्वाब संभाल रखे हैं।
देना दुनिया को माँ ने ही तो है सिखलाया
हर किसी के लिए उसने साथ समान रखे हैं।
मेरी हर ग़लती को माँ माफ़ करना जानती है
फिर मेरी ग़लती पर उसने मेरे सर पर हाथ रखे हैं।
बेबसी और बेक़सी की धूप है चारों तरफ़
माँ ने उम्मीदों के आँचल से छांव दे रखे हैं।
अपनी कमाई से हर दम हैं परेशान पिता
माँ ने कितने कम पैसे में घर संभाल रखे हैं।
माँ से शुरू और माँ पर ही जा ख़त्म हुई
प्यार को भी ईश्वर ने कुछ मक़ाम दे रखे हैं।
माँ सुनते ही आँख मेरी क्यूँ भर आई
क्यूँ उसने हाथ मेरे अब नहीं थाम रखे हैं।
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