आपका आना सौग़ात दे गया
हमें भी यादों की बारात
दे गया
कुछ पल ख़ुद में कितना
यक़ीन हैं लाते
साथ बिता वो पल बेइंतिहा
जज़्बात दे गया
वक़्त को जाना है वो हर
हाल में जाएगा
पर न भूलनेवाला वो एक ख़यालात
दे गया
हम से पूछिए वो पल
कितना बेशक़ीमती था
जो हम सबों को आपका सुनहरा
साथ दे गया
न मुमकिन है उन्हें दिल
से भुला देना
जो ज़िंदगी में ख़ुशियों की बरसात दे गया
एक बार तहे दिल से
शुक्रिया बोल दे
बेहतरीन
ReplyDeleteशुक्रिया
Deleteश्री प्रताप सोमवंशी जी के लिए रचित यह रचना भावपूर्ण है। वे एक सहृदय कवि हैं। उनके कथ्य उनके व्यक्तित्व की संपूर्ण संवाहिका हैं।
ReplyDeleteआपको इस नव्य रचना के लिए बधाई।
धन्यवाद अशोक जी .... कुछ पल यादगार बन ही जाते हैं .. मुझे यक़ीन है वो आपके और हम सब के लिए स्मरणीय दिन रहा । एक बार पुनः शुक्रिया।
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