Friday, 30 December 2016

आपका आना सौग़ात दे गया

आपका आना सौग़ात दे गया
हमें भी यादों की बारात दे गया

कुछ पल ख़ुद में कितना यक़ीन हैं लाते
साथ बिता वो पल बेइंतिहा जज़्बात दे गया

वक़्त को जाना है वो हर हाल में जाएगा
पर न भूलनेवाला वो एक ख़यालात दे गया

हम से पूछिए वो पल कितना बेशक़ीमती था
जो हम सबों को आपका सुनहरा साथ दे गया

न मुमकिन है उन्हें दिल से भुला देना
जो ज़िंदगी में ख़ुशियों की बरसात दे गया

एक बार तहे दिल से शुक्रिया बोल दे
जाते हुए कोई हमें भी इक आवाज़ दे गया







4 comments:

  1. श्री प्रताप सोमवंशी जी के लिए रचित यह रचना भावपूर्ण है। वे एक सहृदय कवि हैं। उनके कथ्य उनके व्यक्तित्व की संपूर्ण संवाहिका हैं।

    आपको इस नव्य रचना के लिए बधाई।

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    1. धन्यवाद अशोक जी .... कुछ पल यादगार बन ही जाते हैं .. मुझे यक़ीन है वो आपके और हम सब के लिए स्मरणीय दिन रहा । एक बार पुनः शुक्रिया।

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