वक़्त भी ख़ुद से कुछ
ख़फ़ा ख़फ़ा होगा
वक़्त क्या अच्छा होगा वक़्त
क्या बुरा होगा
जिसे देखिए ‘नया साल
मुबारक’ बोल रहा हैं
लगता है आने वाला साल
सही में अच्छा होगा
लीजिए माना वक़्त हमें
मुफ़्त में ही है मिला
पर किसी को दिया ये तोहफ़ा
सबसे महँगा होगा
मेरी हर बात को हर
वक़्त मिटाने में वो लगे हैं
पर उस दिन क्या करेंगे
जब वक़्त पे ये लिखा होगा
आज सोचा है वक़्त को
वक़्त से छीनेंगे
वक़्त माँगने से कब
किसी को मिला होगा
हम सोचते रहे हमारे पास
वक़्त ही वक़्त है पड़ा
पर कोई कहे वक़्त कभी
किसी के चलाये चला होगा
वक़्त की बेबसी अब घुटन
से है भरी
माना यादों से वक़्त
कभी नहीं जुदा होगा
चलो एक बार फिर पीछे
मुड़कर हैं खोजते
वक़्त शायद मेरा वहीं पर
कहीं गिरा होगा
वक़्त की सबसे ज़्यादा
हमें ही तो है ज़रूरत
और सबसे ज़्यादा हमने
ही इसे बर्बाद किया होगा
Waah! Khuubsuuat #Ghazal
ReplyDeleteतहे दिल से शुक्रिया आपको पसंद आया।
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