चलो अब हम भी सबको नया
साल मुबारक बोल दें
कुछ राज़ दिल के आज हम
भी महफ़िल में खोल दें
हम जानते हैं साल आएगा
और साल जाएगा
पर लोगों की बातों को
हम भी कुछ तोल दें
कलेंडेर के बदलने से
क्या कुछ बदल जाएगा
पर उम्मीदों के कुछ
पिटारे अब हम भी खोल दें
एक साल ज़िंदगी का
लीजिए गुज़र गया
आज अपनी ज़िंदगी को भी
कुछ टटोल ले
ऐ साल हो सके तो अपनी बुरी
यादों को तू ले जा
हम भी अपनी बातों को अब
कुछ तो नया मोड़ दें
नया साल क्या कुछ
ज़िंदगी में नया लाएगा
वक़्त है ये, तो हम
क्यूँ इसे इतना मोल दें
नए साल के आने की ख़ुशी
वो भी इस तरह
देखते हैं समय ज़िंदगी
में कौन सा नया जोड़ दे
बीते साल का तहे दिल से
शुक्रिया तूने बहुत सिखाया
देखते हैं नया साल कौन
सा तोहफ़ा हमें अनमोल दे
बहुत सुंदर कविता है
ReplyDeleteतहे दिल से शुक्रिया
Delete