Saturday, 31 December 2016

चलो अब हम भी सबको नया साल मुबारक बोल दें

चलो अब हम भी सबको नया साल मुबारक बोल दें
कुछ राज़ दिल के आज हम भी महफ़िल में खोल दें

हम जानते हैं साल आएगा और साल जाएगा
पर लोगों की बातों को हम भी कुछ तोल दें

कलेंडेर के बदलने से क्या कुछ बदल जाएगा
पर उम्मीदों के कुछ पिटारे अब हम भी खोल दें

एक साल ज़िंदगी का लीजिए गुज़र गया
आज अपनी ज़िंदगी को भी कुछ टटोल ले

ऐ साल हो सके तो अपनी बुरी यादों को तू ले जा
हम भी अपनी बातों को अब कुछ तो नया मोड़ दें

नया साल क्या कुछ ज़िंदगी में नया लाएगा
वक़्त है ये, तो हम क्यूँ इसे इतना मोल दें

नए साल के आने की ख़ुशी वो भी इस तरह
देखते हैं समय ज़िंदगी में कौन सा नया जोड़ दे

बीते साल का तहे दिल से शुक्रिया तूने बहुत सिखाया
देखते हैं नया साल कौन सा तोहफ़ा हमें अनमोल दे


2 comments:

  1. बहुत सुंदर कविता है

    ReplyDelete
    Replies
    1. तहे दिल से शुक्रिया

      Delete