ज़िंदगी ने कब किसकी क़ीमत है लगाई
सच ये है मौत ने
इंसानों को क़ीमत है दिलाई।
मौत वो नहीं जो हमें मर
के ही है मिले
ज़िंदा रहते हुए भी कई
बार हमने मौत है पाई।
वो जो मर कर भी यादों
में जी रहें हैं
उन दीवानों को मौत भी मौत
न दे पाई।
ज़िंदगी पर यक़ीन अब हर
कोई है खो रहा है
मौत आयेगी यक़ीनन ये यक़ीन
बन कर है आई।
इश्क़ मौत के सामने कब बेबस दिखा
मौत ने इश्क़ से कई बार मात है खाई।
मौत को जब सामने पाया तो ये जाना
दौलत नहीं बस ये
साँस बेशक़ीमती हमने पाई।
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