Friday, 2 December 2016

ज़िंदगी ने कब किसकी क़ीमत है लगाई

ज़िंदगी ने कब किसकी क़ीमत है लगाई
सच ये है मौत ने इंसानों को क़ीमत है दिलाई।

मौत वो नहीं जो हमें मर के ही है मिले
ज़िंदा रहते हुए भी कई बार हमने मौत है पाई।

वो जो मर कर भी यादों में जी रहें हैं
उन दीवानों को मौत भी मौत न दे पाई।

ज़िंदगी पर यक़ीन अब हर कोई है खो रहा है
मौत आयेगी यक़ीनन ये यक़ीन बन कर है आई।

इश्क़ मौत के सामने कब बेबस दिखा
मौत ने इश्क़ से कई बार मात है खाई।

मौत को जब सामने पाया तो ये जाना
दौलत नहीं बस ये साँस बेशक़ीमती हमने पाई।



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