Saturday, 23 September 2017

कुछ दे कर ही कुछ पा रहे हैं

कुछ दे कर ही कुछ पा रहे हैं
आप सौदे से क्यों घबरा रहे है

सौदा ज़िन्दगी की एक हकीकत
सौदे से हम ज़िन्दगी चला रहे हैं 

कोई सौदे का सलीका समझाए उन्हें 
बार बार के सौदे से वो टूटते जा रहे हैं 

अच्छा सौदा ज़िन्दगी संवारेगी 
आप ज़िन्दगी को क्यूँ डरा रहे हैं

सौदे का एक धर्म मुनाफा 
आप अहम से घाटा खा रहे हैं 

अब कुछ निवेश खुद में भी करेंगे
हमारी बात से वो खफा नज़र आ रहे हैं 

हमने तो बस सौदे की बात कही
आप इसमें पैसा क्यों घुसा रहे हैं 

सुकून की चाहता किसे नहीं दुनिया में 
हम भी चैन के लिए सौदा अपना रहे हैं  
  

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