अजीब सा उस शख्स से रिश्ता है
जो दर्द दे गया सुकून उसी में दिखता है
उसकी मुस्कान से दिल मुनव्वर हो
उसके दर्द में दिल दर्द लिखता है
खुद को हमने मशरूफियत से संवारा है
उसका चेहरा पर वक्त से नहीं छिपता है
अपनी चाहते खुद से भी छिपाई है
कोई तो बाजार मिले जहाँ ये बिकता है
अपनी ही नज़रों से नफरत सी होने लगी
अँधेरे में इन्हें उम्मीद का बादल दिखता है
जो दर्द दे गया सुकून उसी में दिखता है
उसकी मुस्कान से दिल मुनव्वर हो
उसके दर्द में दिल दर्द लिखता है
खुद को हमने मशरूफियत से संवारा है
उसका चेहरा पर वक्त से नहीं छिपता है
अपनी चाहते खुद से भी छिपाई है
कोई तो बाजार मिले जहाँ ये बिकता है
अपनी ही नज़रों से नफरत सी होने लगी
अँधेरे में इन्हें उम्मीद का बादल दिखता है
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