Saturday, 23 September 2017

अजीब सा उस शख्स से रिश्ता है

अजीब सा उस शख्स से रिश्ता है 
जो दर्द दे गया सुकून उसी में दिखता है 

उसकी मुस्कान से दिल मुनव्वर हो 
उसके दर्द में दिल दर्द लिखता है 

खुद को हमने मशरूफियत से संवारा है 
उसका चेहरा पर वक्त से नहीं छिपता है 

अपनी चाहते खुद से भी छिपाई है 
कोई तो बाजार मिले जहाँ ये बिकता है 

अपनी ही नज़रों से नफरत सी होने लगी 
अँधेरे में इन्हें उम्मीद का बादल दिखता है







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