Monday, 18 September 2017

कुछ बातों को जो खुद से छुपा बैठे

कुछ बातों को जो खुद से छुपा बैठे
यूँ लगा हम खुद को ही भुला बैठे 

कुछ वक्त को भुलाने की कोशिश में 
वक्त-बे-वक्त हम खुद के पास आ बैठे 

हम जिन्हें भूल कर भूल न पाए 
वो वक्त से हर रिश्ता निभा बैठे 

कैसे हम उन्हें जिंदगी से मिटा दे 
दिल में जो खुद को छिपा बैठे

ज़िन्दगी जीने की भी फुर्सत नहीं 
ऐसे हालत में कौन याद आ बैठे 

उम्मीदों को अब कल का ही सहारा
क्या जाने कल वक्त वफ़ा निभा बैठे

अब कुछ रात का रहे ख्याल 
दिन तो हम यूँ ही गवाँ बैठे 



  

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