इतना अहसान हम करते नहीं
जो खुद कुछ देर का मेहमान हो
जिन्दों के लिए हम मरते नहीं
जो खुद कुछ देर का मेहमान हो
ऐसे वक्त से अब हम डरते नहीं
लफ्ज़ की जादूगरी कहीं और जनाब
शब्दों के मायाजाल में हम बंधते नहीं
जो उठने की कोशिश में गिर रहा हो
ऐसे इंसानों पे कभी भी हँसते नहीं
जो समझ न आये वो महान है
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